पूछा आज मेरे गमों ने मुझसे
क्यों हमारा ज़िक्र सबसे किया करती हो,
लोग सुन के मन में हंसते है
और तुम आहें भरा करती हो
क्यो हो इतनी कमज़ोर की हमारा बोझ उठा नही
पाती
क्या तुम अकेली हो!मुसीबतें क्या दूसरों पर नही आती
माना कि घाव तुम्हारे काफी गहरे है
पर याद रखो सुनने वाले सभी दिल से बहरे है
इसलिए बंद करो लोगो से हमारा ज़िक्र करना
तुम खुद ही काफी हो
खुद ही अपनी
फिक्र करना
जिंदगी वही लोग जी पाते है
जो अपने गम बांटते नही छुपाते है
हम तो थोड़े दिन के मेहमान है चले
जायेंगे
हमारे जाते ही सुकूँ भरे पल आएंगे
तब खूब जी भर के जीना हम नही सतायेंगे
देखना तुम्हारे दिल पे छाए गमों के बादल
जल्दी छंट जाएंगे
क्यों हमारा ज़िक्र सबसे किया करती हो,
लोग सुन के मन में हंसते है
और तुम आहें भरा करती हो
क्यो हो इतनी कमज़ोर की हमारा बोझ उठा नही
पाती
क्या तुम अकेली हो!मुसीबतें क्या दूसरों पर नही आती
माना कि घाव तुम्हारे काफी गहरे है
पर याद रखो सुनने वाले सभी दिल से बहरे है
इसलिए बंद करो लोगो से हमारा ज़िक्र करना
तुम खुद ही काफी हो
खुद ही अपनी
फिक्र करना
जिंदगी वही लोग जी पाते है
जो अपने गम बांटते नही छुपाते है
हम तो थोड़े दिन के मेहमान है चले
जायेंगे
हमारे जाते ही सुकूँ भरे पल आएंगे
तब खूब जी भर के जीना हम नही सतायेंगे
देखना तुम्हारे दिल पे छाए गमों के बादल
जल्दी छंट जाएंगे
0 Comments
एक टिप्पणी भेजें
True Life Love Stories: 'How I Met My Sweetheart'.