#काश_समझ_पाती_मुझे
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बहुत #प्यार करता था तुमसे,
पर तेरा रास्ता कोई और ही था....
मेरी #मंजिल बन के रहीं तू,
पर तेरा रास्ता कोई और ही था....
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मैं खुद को तेरे हवाले करता रहा,
पर तेरा इरादा कोई और ही था...
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बहुत #डर जाया करता था ,
उन #ख़्वाबों से मै,
जिनमें तू, मुझे
मुझसे दूर नज़र आती थी....
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मैं तेरे #झूठ को सच मानता रहा,
पर तेरा सच कोई और ही था...
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मेरी #मंजिल बन के रहीं तू,
पर तेरा #रास्ता कोई और ही था...
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कितनी #उलझने दे दी तुमने मुझे,
इन्हें सुलझाऊ या इनमें और उलझ जाऊ...
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तुझसे दूर चलता हूं तो,
तेरे करीब ही आ जाता हूं..
खुद से ही दूर चला जाऊ,
या तेरे करीब ही आकर #ठहर जाऊ...
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कोई #शाम बन के आना कभी,
कम से कम #सुकून से,
तेरी #बाहों में सो तो जाऊंगा...
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समझ नहीं आता तुझे,
सहारा कहूं अपना,
या #जहर समझ कर #मर जाऊं...
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तेरी #खूबसूरती से मैं,
अपने चांद को चिढ़ाता रहा,
पर तेरा #चांद कोई और ही था...
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मेरी #मंजिल बन के रहीं तू,
पर तेरा #रास्ता कोई और ही था...
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मिल कर तेरी #नजदीकियों से,
मेरी #दूरियां सिमट जाया करती थी...
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मैं अक्सर #भटक जाया करता था,
तो मेरे रास्तों की वजह,
तू बन जाया करती थीं...
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मैं हमेशा दूर रहा हूं अपने आप से,
आज भी रहता हूं...
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तू कल भी नहीं थी और आज भी नहीं है,
फिर क्यूं #बेवजह ,
मेरी हर #सजा की वजह बन जाया करती थी....
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मेरे #इश्क की वजह तू बनती रही,
पर तेरा #बहाना कोई और ही था ...
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मेरी मंजिल बन के रहीं तू,
पर तेरा रास्ता कोई और ही था...
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मशरूफ कल भी था मेरा तुझमें,
तुझमें मशरूफ मेरा आज भी है...
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मैं तलाशता नहीं हूं किसी को,
मेरी आरज़ू तू आज भी है....
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तेरे किनारे ही ठहर जाता हूं मैं,
कोई और सहारा मिलता ही नहीं..
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तू चाहे अधूरा‌ फिर से छोड़ जाना,,
तूझसे बेखबर ये दिल आज भी है...
आज भी है....
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मैं अपने हर ख्वाब में तुझे शामिल करता रहा,
पर तेरा ख्वाब कोई और ही था...

मेरी मंजिल बन के रहीं तू,
पर तेरा रास्ता कोई और ही था....
कोई और ही था.........