एक दिन गए थे जिस्म के बाजार में तो पूछा एक औरत से यहां जिस्मो का प्यार किस भाव बिकता ह ..और य जिस्मो का बाजार कैसे बनता ह ........तो औरत ने कहा साहब यहा मोल अलग ह भाव अलग जैसा हो माल उसका दाम अलग ह ..आप..बोलो आप को क्या पसंद ह यहा सब का जिस्म एक ह बस कोई गौरा तो कोई काला ह बस सब रंगो का खेल ह .......यहा कोई किसी का नहीं साहब बस लोग आते ह चेले जाते ह किसी का चेहरा भी याद नहीं पता नहीं कितने इस जिस्म से खेलकर ...चले जाते ह पर यहा की औरत में जज्बातो और अहसासों का काम नहीं बस अपने सपने करियर सब छोड़कर इस दलदल की आग में कूद जाती ह ...आती ह इस दलदल में पर वापस नहीं निकल पाति ह ....साहब धंधे वाली भी ऐसे ही नहीं बन जाती हजारो जख्मो को सहकर लोग की बदनामी के पार आकर ....दुनिया में बदनाम होकर जिस्म को बेच जाती ह इस पेट के लिए बेचना पड़ता ह जब दुनिया में हमारे लिए औरत के नाम पर कोई जगह नहीं होती तो इस कोठे पर हमारी जिस्मो की कहानी बन जाती ह ....हम. भी सपने देखते ह साहब पर इस मतलबी दुनिया की वजह से हमारी अहमियत मिट जाती ह ......
पर बातो ही बातो में हमे दुनिया का सच दिखा दिया .....हमारी और हमारी दुनिया की सोच भी ऐसी हो गयी की हर लड़की को हमने बदनाम कर दिया .....कोई भाई के साथ भी गुमे तो उसको भी गलत निगाहो से देख लिया चाहे वो उसका खास भाई ही क्यों ना हो पर बिना जाने ही गलत सोच लिया ....कोई लड़की दिखी सामने तो दोस्तों ने मिलकर बातो में ही उसका रेप कर दिया ...किया उसके साथ कुछ नहीं फिर उसके बदन से कपड़ा हटा दिया .....दुनिया की हर लड़कियों में हमारी बहन हमारी माँ भी आती ह तो क्यों हर लड़की के लिए गलत सोच लिया ...
अरे एक धंधे वाली औरत को कोई नहीं कहता की इसके साथ क्या करना ह ....पर एक आम लड़की को देखकर सब सोचते ह य मिल जाय तो इसके साथ क्या क्या करना ह .......कोई लड़की केसी भी हो पर बिना जाने बिना देखे ही सोच लेते ह और दुनिया कहती ह पता इसके कितने यार ह .........बस कुछ गलत सोचने से पहले य सोचना आज किसी की बहन या बेटी ह तो कल हमारी बहन या बेटी किसी और की नजरो का सीकार ह ......
किसी को बुरा लगे तो माफ़ी यारो
गुड़ मॉर्निग जी दोस्तों
अलविदा