#सकारात्मक रवैया
# इसे_भी_समझें।!
एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था।
वहाँ रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेल थे।
रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे ...
इंजिन और डिब्बे बच्चे बच्चे बदल जाते हैं,
पर ...
केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।
एक दिन मैंने देखा कि ...
उन बच्चों को खेलना रोज़ देखना एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर सम्मान ....
"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"
इस पर वो बच्चा ...
"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे बच्चे मुझे कैसे पकड़ ... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा ....?
इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूं।
"ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी मनाया।"
आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया ...
अपना जीवन कभी भी नहीं होता है। उसमें कोई नहीं कोई जरुर रहेगी ....
वो बच्चा माँ-बाप से गसुस्सा होकर रोते हुए बैठे हो सकता था। परन्तु ऐसा नहीं कर रहा है परिस्थितियों का समाधान अनुभव।
हम कितना रोते हैं?
कभी अपने साँदे रंग के लिए,
कभी छोटे क़द के लिए,
कभी पड़ौसी की बड़ी कार,
कभी पड़ोससन के गले का हार,
कभी अपने कमरक्स,
कभी अंग्रेजी,
कभी पर्सनालिटी,
कभी नौकरी की मार तो
कभी धंधे में मार ...
हमें इससे बाहर आना पड़ता है ....
ये जीवन है ... इसे ऐसे ही जीना पड़ता है।
चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी डिप्रेशन में नहीं आती,
वो स्वयं आस्तिक में मस्त रहती है,
मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाता है।
तुलना से बचें और खुश रहें।
मेरी खुद हैं मंजिलें, मेरी खुद की दौड़ .. !!!
स्नेह वंदन
नेचुराथथ कौशल
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🌹
सदा मुस्कुराते रहिए
सकारात्मक रहें

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