हम सभी दूध, दही, मक्खन, घी, पानी आदि को लेकर असमंजस में रहते हैं कि कब क्या खाएं-पियें, कैसे खाएं-पियें।
जानिये जल, दही, घी, मक्खन, दूध के पीने के तौर-तरीकों को..■■ जल ■■
भोजन करने से तुरंत पहले (कम से कम पौना घंटा पहले पियें) जल पीने से पाचन-शक्ति कमजोर होती है और शरीर दुर्बल।
भोजन के बीच में घूंट घूंट कर थोड़ा सा पानी पी सकते हैं, जब आधा भोजन बाकी बचा हो।मोटे शरीर वाले को भोजन के बीच में, पतले को आधा घंटा बाद शेष सभी को 1 घंटा बाद पानी पीना चाहिए, दिन के भोजन के तुरंत बाद सर्दियों में हल्दी डालकर व अन्य ऋतुओं में हिंग्वाष्टक या लवण भास्कर चूर्ण डालकर छांछ (लस्सी, मट्ठा, तक्र) पीना चाहिए जो दही के कुल वजन से चौथाई पानी डालकर तैयार किया गया हो।
● अपवाद ●
जो लोग किसी दर्द, सिर के रोग, हिचकी, दमा, खाँसी या टी. बी से ग्रस्त हैं तथा गायन, भाषण देना पड़ता है वो भोजन के कम से कम दो घंटा बाद जल पियें।
■■ दही ■■
दही मट्ठे (छाच)की अपेक्षा भारी, स्त्रोत में रुकावट लाने वाली, उष्णवीर्य, कब्ज करने वाली, पाचन और शुक्र को बढाने वाली होती है।
सामान्यतः रात्रि में दही न खाएं व मध्य मार्च से लेकर मध्य जुलाई तक और मध्य सितंबर से लेकर मध्य नवंबर तक दही खाना मना है।
दही आग या धूप में गर्म करके कभी न खाएं और न ही नमक आदि युक्त कोई चूर्ण डाले बिना।
■■ घी ■■
सभी प्रकार के चिकने पदार्थों में घी वो भी गाय का और उसमें भी केवल देशी गाय का उत्तम है।
ये जितनी कम्पनियां घी बेच रही हैं यह तो भैंस के घी से भी निकृष्ट है, स्वयं सोचें जितना कुल मिलाकर पूरे भारत में दूध नहीँ होता उससे अधिक घी बेच देते हैं क्योंकि यह सब इम्पोर्टेड आयातित बटर ऑयल है। केवल देशी गाय का घी हृदय, मानसिक, जलन, पागलपन आदि रोग में लाभकारी है जबकि भैंस का घी बल, मोटापा, शुक्र आदि बढाने में उत्तम।
■■ मक्खन ■■
दही से निकाला गया मक्खन कुछ मीठा-कुछ कसैला, ठंडा, वातपित्त शामक, शुक्रवर्धक और हृदय व बुद्धी के लिए उत्तम होता है जबकि दूध से निकला मक्खन दही के मक्खन से भी शीतल प्रकृति व खांसी, बवासीर, लकवा, और आँखों के रोग के लिए विधी पूर्वक प्रयोग करना उत्तम होता है।
■■ दूध ■■
गुणों की दृष्टि से गाय का दूध सबसे उत्तम, काली गाय का वात हर (दर्द आदि में लाभकारी) व पीली गाय का वात-पित्त हर होता है। जबकि भैंस का दूध गाय के दूध की अपेक्षा अधिक शीतल, चिकना, भारी और वायुकारक होता है लेकिन नींद लाने के लिए (अनिद्रा रोग) में अतिउत्तम।
■■ अन्य तथ्य ■■
सुबह के समय विशेष कारणों को छोड़कर दूध पीना हीन व रात्रि में उबलते समय हल्दी डालकर पिया गया उत्तम, भैंस का दूध हमेशा थोड़ा पानी डालकर उबालें व इसके अलावा श्वास-खांसी आदि रोगों में पीपली, सौंठ, मुल्हैठी डालकर उबालकर पीने से रोगहर होता है।
नेचुरोपैथ कौशल
9215522667
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