ऐलोपैथी में देखा होगा डॉक्टर कहते है ये ये गोली इस इस समय लेना।
फिर आप पूछते हो कोई परहेज तो 99% डॉक्टर कहते हैं सब खाओ।
पर जब आप वैद्य के पास जाते हो तो वो औषधि के साथ साथ ढेर सारी निषेधाज्ञा भी दे देता है।
यह लो वह न लो,
वह तब लेना,खाने के पहले लेना,
खाने के बाद लेना ।
यह अंतर क्यों ?
क्योंकि वैद्य खाई चीजों के प्रभाव को गहराई से समझता है।
वैद्य आपको भोजन के साथ फल लेने को मना करेगा। क्यों ?
क्योंकि वैद्य को पता है कि पेट में भोजन को एसिड पचाता है और फल बेसिक होते हैं।
यदि भोजन के साथ फल लोगे तो फलों का बेस पेट के एसिड से लड़ जायेगा और भोजन पचेगा नहीं सड़ेगा।
आप कहोगे अजीब पागल है, भोजन न हो तो फल खाके पेट भरते हैं लोग, फल कैसे मना कर सकता है कोई।
तो यह सत्य है कि भोजन न मिलने पर भूंख लगने पर फल खाके क्षुदा मिटाई जा सकती है।
पर भोजन के साथ फल लेना मूर्खता है।
मात्र केला भोजन के साथ ले सकते हैं शेष कोई फल नहीं ।
क्यों.? क्योंकि फल का क्षार पेट के एसिड को मार देगा तो भोजन गलेगा, पचेगा कैसे.?
और जब भूंख लगने पर मात्र फल ले रहे हो तब ? तब फलों का बेस पेट के एसिड को नही मारेगा क्या ?
हाँ फलों का रस पेट के एसिड को मार देगा और फिर भी फल पच जाएंगे क्योंकि फलों में पचाने को कुछ होता ही नहीं है ये पहले ही पचे पचाये होते हैं।
इनको छोटे कणों में तोड़ने को कोई एसिड की आवश्यकता नहीं।
भोजन जब पचता है तो उससे रस बनता है जो देह निर्माण में लगता है और भोजन जब अग्नि (एसिड) की कमी से सड़ता है तो उससे वायु बनती है और आम बनती है जो जोड़ों में फसकर रोग बनाती है।
तो वैद्य भोजन के साथ फल निषेध कराकर आम बनना और वायु बनना रोकता है।
तो समझ गए मात्र फल खाने हों तो भोजन के रूप में तो खा सकते हो पर भोजन के साथ खाये तो गड़बड़ है।
रसीले फल नहीं लेने भोजन के साथ।
मेरा निजी अनुभव है भोजन के बाद अंगूर खाता था तो वायु बनती थी।
एक दो आम या केला खाओगे तो नहीं बनेगी।तरबूज में सबसे अधिक रस होता है। इसे भोजन के साथ लोगे तो राम ही मालिक है आपका।
मुझे इस फल से बड़ा डर लगता है।
भोजन के तीन घण्टे बाद तरबूज खाओ तो उत्तम, क्षारीय है अतः आपके रक्त में भरे एसिड को नष्ट करता है जिससे आंतरिक ठंडक आती है।
तो वैद्य क्यों मना कर रहा है ?
जिससे आपके उदर का एसिड व्यर्थ नष्ट न हो, वायु न बढ़े।
आपको वायु जनित रोग हो रखा है और आप इस प्रकार से वायु बनाये जा रहे हो तो दी गयी औषधि कहाँ लाभ दिखा पायेगी।
औषधि प्रभाव डालेगी, पर गलत आहार से बढ़े दोष से व्यर्थ हो जायेगी।जितनी वायु औषधि से कम होगी उतनी गलत आहार से बन जायेगी।
फिर कहोगे हमें तो कोई लाभ नहीं हुआ।
एक और उदाहरण लो
हमने बताया गिलोय का काढ़ा बीपी कम करता है और बताया प्रातः और सांय लेना खाली पेट ही लेना ।
पर आप लेने लगे भोजन के पहले या बाद तो क्या होगा ?
गिलोय कफ भी कम करती है और पित्त यानि एसिड भी कम करती है।
पेट में भोजन एसिड पचाता है अगर गिलोय भोजन के साथ लोगे तो गिलोय पेट के एसिड को नष्ट कर देगी फिर भोजन कौन पचायेगा। तब भोजन पचेगा नहीं सड़ेगा। सड़ेगा तो वायु बनेगी गन्दा रस बनेगा ।और गिलोय प्रातः खाली पेट लोगे तो - तब उसका रस रक्त से पित्त यानि एसिड हटा कर आपका बीपी कम कर देगा।
कफ बढ़ा हुआ है तो उसे भी कम कर देगा जिससे जुकाम आदि नहीं रहेगा।
ज्वर रक्त में पित्त या कफ बढ़े होने से होते हैं और गिलोय दोनों को कम कर देती है इसलिए गिलोय ज्वर में लाभ देती है, थोड़ी मात्रा बढ़ानी होगी बस।
यही गिलोय भोजन के साथ लोगे तो पाचन बिगाड़ के कोई लाभ न देगी।
तो आयुर्वेद में क्या, कब, कितना लेना है, क्या नहीं लेना है, यह बड़ा महत्वपूर्ण है।
ऐलोपैथी वाले जानते ही नही कि वात, पित्त, कफ कुछ होता है अतः वो इस विषय पर कुछ बोल ही नहीं पाते अतः कहते है सब खाओ।
अगले को जुकाम हो रखा है और डॉक्टर ने बोला है सब खाओ तो वो सब खा रहा है और दोनों टाइम दही और चावल पेले जा रहा है और गोली खाके भी उसका जुकाम नहीं जा रहा।
ठीक कहाँ से होगा पहले विरुद्ध आहार तो बन्द करो।
पहले के डॉक्टर आयुर्वेद का कहना मानने वाले लोगों के बच्चे थे।
अतः उनमे थोड़ी आयुर्वेदिक बुद्धि थी कि यह खाना है, यह नही।
अब के डॉक्टर उन लोगों के बच्चे हैं जो आयुर्वेद के निर्देशों से बहुत दूर के माँ बाप से बने है अतः
आज के डॉक्टर खाने में कोई परहेज बताते ही नही क्योंकि उन्हें खुद नहीं पता कि क्या कब खाना है कब नही।
हमने बताया गिलोय का काढ़ा बीपी कम करता है और बताया प्रातः और सांय लेना खाली पेट ही लेना ।
पर आप लेने लगे भोजन के पहले या बाद तो क्या होगा ?
गिलोय कफ भी कम करती है और पित्त यानि एसिड भी कम करती है।
पेट में भोजन एसिड पचाता है अगर गिलोय भोजन के साथ लोगे तो गिलोय पेट के एसिड को नष्ट कर देगी फिर भोजन कौन पचायेगा। तब भोजन पचेगा नहीं सड़ेगा। सड़ेगा तो वायु बनेगी गन्दा रस बनेगा ।और गिलोय प्रातः खाली पेट लोगे तो - तब उसका रस रक्त से पित्त यानि एसिड हटा कर आपका बीपी कम कर देगा।
कफ बढ़ा हुआ है तो उसे भी कम कर देगा जिससे जुकाम आदि नहीं रहेगा।
ज्वर रक्त में पित्त या कफ बढ़े होने से होते हैं और गिलोय दोनों को कम कर देती है इसलिए गिलोय ज्वर में लाभ देती है, थोड़ी मात्रा बढ़ानी होगी बस।
यही गिलोय भोजन के साथ लोगे तो पाचन बिगाड़ के कोई लाभ न देगी।
तो आयुर्वेद में क्या, कब, कितना लेना है, क्या नहीं लेना है, यह बड़ा महत्वपूर्ण है।
ऐलोपैथी वाले जानते ही नही कि वात, पित्त, कफ कुछ होता है अतः वो इस विषय पर कुछ बोल ही नहीं पाते अतः कहते है सब खाओ।
अगले को जुकाम हो रखा है और डॉक्टर ने बोला है सब खाओ तो वो सब खा रहा है और दोनों टाइम दही और चावल पेले जा रहा है और गोली खाके भी उसका जुकाम नहीं जा रहा।
ठीक कहाँ से होगा पहले विरुद्ध आहार तो बन्द करो।
पहले के डॉक्टर आयुर्वेद का कहना मानने वाले लोगों के बच्चे थे।
अतः उनमे थोड़ी आयुर्वेदिक बुद्धि थी कि यह खाना है, यह नही।
अब के डॉक्टर उन लोगों के बच्चे हैं जो आयुर्वेद के निर्देशों से बहुत दूर के माँ बाप से बने है अतः
आज के डॉक्टर खाने में कोई परहेज बताते ही नही क्योंकि उन्हें खुद नहीं पता कि क्या कब खाना है कब नही।
संकलन
नेचुरोपैथ कौशल
9215522667
नेचुरोपैथ कौशल
9215522667

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