पक्षाघात (लकवा) Paralysis
लकवा एक गम्भीर रोग है। शरीर का एक अंग मारा जाता है। अंग निष्क्रिय हो जाने से रोगी असहाय हो जाता है।पक्षाघात (लकवा) के कारण
शरीर के किसी भाग में खून न पहुंचने से अंग सुन्न होना लकवा है।कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन,
बीपी के बढ़ने,
मर्म स्थान पर चोट पहुंचने,
मानसिक दुर्बलता,
नाड़ियों की कमजोरी।
पक्षाघात (लकवा) की पहचान
सिंधियों तथा जोड़ों में शिथिलता।
अंग का बेकार होना।
अंग को चलाने, फिराने में असमर्थ।
मुख पर गिरने से बोलने की असमर्थता।
आंख, नाक, कान आदि विकृत होना।
दांतों में दर्द, गरदन टेढ़ी, होंठ नीचे की तरफ लटकना।
तुलसी के पत्ते, अफीम, नमक और दही का लेप अंगों पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगाएं।
कलौंजी के तेल की मालिश लकवे के रोगी के लिए रामबाण है।
तिली के तेल में कालीमिर्च मिलाकर इसकी मालिश पर करें।
सोंठ और उरद (साबुत) को 200 ग्राम पानी में उबालें, छाने, दिन में 4-5 बार दें।
पानी में शहद डालकर रोगी को दिन में 4-5 बार दें (लगभग 100gm)
अजमोद 10gm, सौंफ 10gm, बबूना 5gm, बालछड़ 10gm तथा नकछिनी 20gm-
सबको पानी में काढ़ा बना लें।
एक शीशी में भरकर रख लें।
4 चम्मच काढ़ा प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करें।
सबको पानी में काढ़ा बना लें।
एक शीशी में भरकर रख लें।
4 चम्मच काढ़ा प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करें।
सरसों के तेल में थोड़े से धतूरे के बीज डालकर पकायें, तेल को छानकर मालिश करें।
दूध में एक चम्मच सोंठ और जरा सी दालचीनी डालकर उबालें, छाने, थोड़ा शहद डालकर लेँ।
लहसुन की 4-5 कलियां मक्खन के साथ लें।
क्या खाएं.?
गेहूं की रोटी,
बाजरे की रोटी,
कुलथी, परवल, करेला, बैंगन, सहजन की फली, लहसुन, तरोई।
गेहूं की रोटी,
बाजरे की रोटी,
कुलथी, परवल, करेला, बैंगन, सहजन की फली, लहसुन, तरोई।
फलों में पपीता, आम, अंजीर, चीकू।
दूध सुबह-शाम पियें।
क्या नही लेना चाहिये.?
चावल, दही, छाछ, बर्फ की चीजें, तले हुए, दालें, बेसन, चना।
चावल, दही, छाछ, बर्फ की चीजें, तले हुए, दालें, बेसन, चना।
सरसों का तेल, विषगर्भ तेल, तिली का तेल, निर्गुण्डी का तेल, बादाम का तेल या अजवायन का तेल से मालिश करें।
एरण्ड का तेल तथा हरड़-बहेड़ा-आंवला (त्रिफला) भी रोगी लें।
नेचुरोपैथ कौशल
09215522667
09215522667



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